छात्र-युवा आंदोलन के दबाव के आगे सरकार के झुकने को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और इंकलाबी नौजवान सभा ने एक ऐतिहासिक जीत करार देते हुए रविवार को घोषणा की कि आंदोलन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है; जब तक आंदोलन को लेकर युवाओं के ख़िलाफ़ दर्ज किए गए सभी मुकदमे पूरी तरह वापस नहीं ले लिए जाते, तब तक संघर्ष अनवरत जारी रहेगा।
पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुमार सिंह, शिवप्रकाश रंजन, जेएनयू छात्र यूनियन के पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार, सबीर कुमार समेत अन्य छात्र-युवा नेताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन के अड़ियल रवैये पर तीखा हमला बोला।
वक्ताओं ने बिहार बंद के बाद राज्य में शुरू हुए दमन चक्र की कड़ी निंदा की और सिवान और छपरा में भाकपा-माले के पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा सहित आइसा-आरवाईए के स्थानीय नेताओं के घरों पर पुलिस द्वारा की जा रही बर्बर छापेमारी पर गहरी आपत्ति जताई गई।
वक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब सरकार ने समझौते के दौरान यह स्पष्ट आश्वासन दिया था कि आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे, तो फिर पुलिस द्वारा इस तरह का बर्बर दमन क्यों और किसके इशारे पर किया जा रहा है?
संवाददाता सम्मेलन में पुलिस हिरासत में लिए गए सभी नेताओं और छात्रों को बिना शर्त तुरंत रिहा करने की माँग की गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि दमनकारी रुख अपनाते हुए सरकार ने कई प्रमुख चेहरों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जिनमें विधायक संदीप सौरभ (पालीगंज), धनंजय (राज्य अध्यक्ष, आइसा), दीपकर मिश्र (राज्य सचिव, आइसा), सबा आफरीन (राज्य उपाध्यक्ष, आइसा), कुमार दिव्यम (छात्र नेता) आदि शामिल हैं।
इसके अलावा आंदोलन का पुरजोर समर्थन करने वाले राजद नेता तेज प्रताप यादव और राजद विधायक गौतम कृष्ण की गिरफ़्तारियों की भी निंदा की गई और वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार वार्ता की मेज पर समझौता करती है और दूसरी तरफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने वाले विधायकों, छात्र नेताओं और सैकड़ों निर्दोष छात्रों को जेल में ठूँस रही है। यह लोकतंत्र की हत्या है जिसे छात्र-युवा बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
सरकार की इस दमनकारी नीति और वादाखिलाफ़ी के खिलाफ आगामी 30 जुलाई को पूरे बिहार में ‘विरोध दिवस’ मनाने की घोषणा की गई।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)